लोग कहतें है
जिंदगी तो बेवफा है
जिंदगी चार दिन की है
जिंदगी चार पल की है
इसी लिए में जिंदगी को
एक पल में जीना चाहता हूँ,
तो बाकी के तीन पल
उसे जाता देख सकूँ
उस एक पल को मैं एक
जिंदगी देना चाहता हूँ
तो बाकी के तीन पल
उसे महसूस कर सकें
वो न बेवफा है
न चार पल की है
वो जिंदगी है उसे
जिंदगी ही रहने दो
मन की ही रहने दो
अजनबी शहर में...
हर जगह हँसते चेहरे मिले
तेरे अजनबी शहेर में
हर कोई मूज़े अपना सा लगा
तेरे अजनबी शहेर में
तुज़से मिलने के बाद खो गया
तेरे अजनबी शहेर में
कभी सोचा न था यूँ दिल टूटेगा
तेरे अजनबी शहेर में
लगता हैअपना, हर गली नुक्कड़ पे
तेरे अजनबी शहेर में
जैसे हर कोई अदाकार है
तेरे अजनबी शहेर में
तेरे अजनबी शहेर में
हर कोई मूज़े अपना सा लगा
तेरे अजनबी शहेर में
तुज़से मिलने के बाद खो गया
तेरे अजनबी शहेर में
कभी सोचा न था यूँ दिल टूटेगा
तेरे अजनबी शहेर में
लगता हैअपना, हर गली नुक्कड़ पे
तेरे अजनबी शहेर में
जैसे हर कोई अदाकार है
तेरे अजनबी शहेर में
आज हम यहाँ है कल कोई और होंगे
जिंदगी के सफ़र में यही दस्तूर होंगे
महफ़िल सजाई है आपने अपनी यूँही
आप वहाँ सिर्फ़ मेहमान ही और होंगे
आप हों ना हों दुनिया ज़रूर होगी
ज़िदगी की डोर कहीं और होगी
सोचता हूँ क्या जिंदगी, मोत के बाद होगी
फिर सोचता हूँ, इससे तो बेहतर ही होगी
जीलो जितना जी सको एक दिन के लिए
कल की सुबह भी एक नयी सुबह होंगी
जिंदगी के सफ़र में यही दस्तूर होंगे
महफ़िल सजाई है आपने अपनी यूँही
आप वहाँ सिर्फ़ मेहमान ही और होंगे
आप हों ना हों दुनिया ज़रूर होगी
ज़िदगी की डोर कहीं और होगी
सोचता हूँ क्या जिंदगी, मोत के बाद होगी
फिर सोचता हूँ, इससे तो बेहतर ही होगी
जीलो जितना जी सको एक दिन के लिए
कल की सुबह भी एक नयी सुबह होंगी
दूर तक निगाह डाली जिंदगी कहीं नहीं थी
महसूस किया तो कुछ साँसें चल रही थी
हर कोई कंधों पे अपनी लास उठाए घूम रहा था
बॉज़ कितना होगा उसका ये एहसास नहीं था
ज्यों जिंदगी कम हो रही थी बॉज़ बढ़ रहा था
सोचा जा के सुनाउ कहानी किसी और को
हर कोई किसी और को ढूँढ रहा था
सब कुछ था तेरे पास फिर भी अकेला क्यूँ हो गया
शायद जिंदगी अपने अंदर ही कुछ
अपनों को ढूँढ रही थी
दूर तक निगाह डाली जिंदगी कहीं नही थी
मानस.......
महसूस किया तो कुछ साँसें चल रही थी
हर कोई कंधों पे अपनी लास उठाए घूम रहा था
बॉज़ कितना होगा उसका ये एहसास नहीं था
ज्यों जिंदगी कम हो रही थी बॉज़ बढ़ रहा था
सोचा जा के सुनाउ कहानी किसी और को
हर कोई किसी और को ढूँढ रहा था
सब कुछ था तेरे पास फिर भी अकेला क्यूँ हो गया
शायद जिंदगी अपने अंदर ही कुछ
अपनों को ढूँढ रही थी
दूर तक निगाह डाली जिंदगी कहीं नही थी
मानस.......
khavab
हर तरफ कहीं ना कहीं गम है
सब कुछ है फिर भी जिंदगी कम है
थोड़ा है मेरे पास आपकी तुलना में
भूल गया उनको जिनके पास हमसे भी कम है
जिनके पास ज़्यादा है वो बाँटना नहीं चाहते
दूसरा कोई बड़ा हो हमसे हम नहीं चाहते
यही वजह है दूरियाँ बढ़ जाती है और
जिंदगी एक मज़ाक बन के रह जाती है
मैं एक ऐसी जिंदगी की तलाश में हूँ
जहाँ सब के पास सबकुछ हो और
कहीं कोई भी कहीं उदास ना हो
मैं एक ऐसी जिंदगी की तलाश में हूँ
जहाँ सूरज की किरणों का उजाला हो
गम के साए नज़र ना आए ना हो
उदासी कभी किसी के चेहरे पे
मैं एक ऐसी जिंदगी की तलाश में हूँ
जहाँ रीश्तों के सहीं मायने समझे जाए
आई लव यू होंठों से नहीं दिल से निकलें
और आँखों में नज़र आए
मैं जानता हूँ ये मुमकिन नहीं
हो सके तो मेरे ख्वाब कोई सच कर दिखाए
सब कुछ है फिर भी जिंदगी कम है
थोड़ा है मेरे पास आपकी तुलना में
भूल गया उनको जिनके पास हमसे भी कम है
जिनके पास ज़्यादा है वो बाँटना नहीं चाहते
दूसरा कोई बड़ा हो हमसे हम नहीं चाहते
यही वजह है दूरियाँ बढ़ जाती है और
जिंदगी एक मज़ाक बन के रह जाती है
मैं एक ऐसी जिंदगी की तलाश में हूँ
जहाँ सब के पास सबकुछ हो और
कहीं कोई भी कहीं उदास ना हो
मैं एक ऐसी जिंदगी की तलाश में हूँ
जहाँ सूरज की किरणों का उजाला हो
गम के साए नज़र ना आए ना हो
उदासी कभी किसी के चेहरे पे
मैं एक ऐसी जिंदगी की तलाश में हूँ
जहाँ रीश्तों के सहीं मायने समझे जाए
आई लव यू होंठों से नहीं दिल से निकलें
और आँखों में नज़र आए
मैं जानता हूँ ये मुमकिन नहीं
हो सके तो मेरे ख्वाब कोई सच कर दिखाए
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