Things are changing around here...what do you think?
manash
खाक हो जाऊँगा तुमसे जुदा होने पर
फ़िज़ा में घुल जाऊँगा कहीं हवा की तरह
कोई एहसास भी न होगा तुम्हें मेरे होने का
सूखे पत्ते की तरह हवा में बिखर जाऊँगा
रेत की दीवार पे, मेरी तश्वीर बनाई थी तूने
लहर दर लहर लकीर बन बन धूल जाऊँगा
कभी भी न रखना अपनी ज़ूल्फ़ो को खुला सनम
उड़ा के तेरे बालों को अपना एहसास दिला जाऊँगा
कभी ये भरम न रखना की मेरी हस्ती ही न थी
तेरे कदमों की हर आहट में मेरी आह सुना जाऊँगा
हर बार जब दौड़ोगी तुम दरवाजा खोलने के लिए
कोई न होगा तेरे दर पर, में तो वहीं से लॉट जाऊँगा
"मानस" ७-१-२०१३
फ़िज़ा में घुल जाऊँगा कहीं हवा की तरह
कोई एहसास भी न होगा तुम्हें मेरे होने का
सूखे पत्ते की तरह हवा में बिखर जाऊँगा
रेत की दीवार पे, मेरी तश्वीर बनाई थी तूने
लहर दर लहर लकीर बन बन धूल जाऊँगा
कभी भी न रखना अपनी ज़ूल्फ़ो को खुला सनम
उड़ा के तेरे बालों को अपना एहसास दिला जाऊँगा
कभी ये भरम न रखना की मेरी हस्ती ही न थी
तेरे कदमों की हर आहट में मेरी आह सुना जाऊँगा
हर बार जब दौड़ोगी तुम दरवाजा खोलने के लिए
कोई न होगा तेरे दर पर, में तो वहीं से लॉट जाऊँगा
"मानस" ७-१-२०१३
एक शाम थकी हुई जिंदगी की छाँव के नीचे
खुले आसमान के नीचे लेटे आँखें मीचे
देख रहा था मूड के क्या छोड़ आए पीछे
न जाने किन किन रिश्तों को जोड़ आए थे
या एक को पाने के लिए दूसरा छोड़ आए थे?
पता नहीं क्या खोया था थोड़ा पाने के लिए
सीधे सीधे रास्ते पे बहुत से मोड़ आए थे
मंज़िल के पास से गुज़रा मगर खो सा गया था
जो कभी मेरा हाथ पकड़ के चला करते थे
उनके स्पर्श का एहसास पीछे छोड़ आए थे
ना कोई आस, ना कोई एहसाह, ना फरियाद
जाने 'मन' को मार के आगे निकल आए थे
आज भी वो आँखे नहीं मिला सकते हमसे
कुछ ऐसे सवालात जवाबों के सामने छोड़ आए थे
manash
खुले आसमान के नीचे लेटे आँखें मीचे
देख रहा था मूड के क्या छोड़ आए पीछे
न जाने किन किन रिश्तों को जोड़ आए थे
या एक को पाने के लिए दूसरा छोड़ आए थे?
पता नहीं क्या खोया था थोड़ा पाने के लिए
सीधे सीधे रास्ते पे बहुत से मोड़ आए थे
मंज़िल के पास से गुज़रा मगर खो सा गया था
जो कभी मेरा हाथ पकड़ के चला करते थे
उनके स्पर्श का एहसास पीछे छोड़ आए थे
ना कोई आस, ना कोई एहसाह, ना फरियाद
जाने 'मन' को मार के आगे निकल आए थे
आज भी वो आँखे नहीं मिला सकते हमसे
कुछ ऐसे सवालात जवाबों के सामने छोड़ आए थे
manash
સમય ના સમીકરણ ને સમજી શક્યો નહીં
વ્યવહાર ના વ્યાકરણ ને સમજી શક્યો નહીં
સમય સમય ના હિસાબે વહે, જાણે છે "માનસ"
પણ સમય ના સમય નો હિસાબ સમજી શક્યો નહીં
ચૂકવી દીધું છે બધું પણ વ્યાજ હાજી બાકી છે
સંબંધ ના ચક્ર વૃદ્ધિ વ્યાજ ને સમજી શક્યો નહીં
કારણ કોઈ પણ હોય હપ્તો કદી ચૂક્યો નથી પણ
લાગે છે હાજી ચૂકવવા ની શરૂઆત થવી બાકી છે
વહી ગયો સમય, વ્યાકરણ-સમીકરણ બદલાયા નથી
જ્યારે પણ પાછળ વળી જોઉં છું અવાજ આવે છે આગળ થી
આગળ જો "માનસ" હજી ઘણું ચૂકવવા નું બાકી છે
તસ્વીર લાગી ગયી દીવાન-ખાના માં ફૂલો પણ ચઢી ગયા
જેટલાઆવે દિલસોજી માટે અશ્રુભીની આંખે, લેણદાર લાગ્યા
દરેક ના ચહેરા પર ઍક્જ પ્રશ્ન જોઉં છું, તમે તો ચાલ્યા ગયા
કોણ ચૂકવશે હવે જે તમે કયારેય લીધું હતું.....નહીં
સમય ના સમીકરણ ને સમજી શક્યો નહીં
यही जिंदगी की छोटी सी दुकान थी
कुछ आँसू थे कुछ मुश्कान थी
यही जिंदगी की छोटी सी दुकान थी
कुछ खरीदा, कुछ मुफ़्त में मिला
कुछ रिश्तेदारी में उधार मिल गया
इसी तरह जिंदगी का व्यापार चल गया
कहाँ होता है ऩफा इस व्यापार में
जो भी ऩफा होता है उसमें से
कुछ कर्ज़ चुकाने में चला जाता है
कुछ रिश्ते निभाने के फर्ज़ में
मगर इन बातों से दुकान अंजान थी
बही-ख़ाता लिखने बैठा तो सही
मगर कलम कांप रही थी
और जिंदगी की दुकान हाँफ रही थी
अब तो धीरे धीरे शाम हो रही थी
दुकान बंद करने का वक़्त हो गया था
इस कदर जिंदगी थक गयी थी जिंदगी से
पता नहीं कल फिर दुकान खुलेगी या नहीं
पता नहीं जिंदगी का कर्ज़ मिटेगा या नहीं
आँसू व्यापार बन गये हैं और
मुश्कान कारोबार बन गये हैं
जिंदगी 'बिचारी' दुकान बन गयी है
रिश्ते मुनाफ़ा करने का आधार बन गये हैं
'मानस' तू भी कहाँ बाकी रहा इन बवाल से
तभी तो सभी बुलाते, तुझे व्यापारी के नाम से
यही जिंदगी की छोटी सी दुकान थी
कुछ खरीदा, कुछ मुफ़्त में मिला
कुछ रिश्तेदारी में उधार मिल गया
इसी तरह जिंदगी का व्यापार चल गया
कहाँ होता है ऩफा इस व्यापार में
जो भी ऩफा होता है उसमें से
कुछ कर्ज़ चुकाने में चला जाता है
कुछ रिश्ते निभाने के फर्ज़ में
मगर इन बातों से दुकान अंजान थी
बही-ख़ाता लिखने बैठा तो सही
मगर कलम कांप रही थी
और जिंदगी की दुकान हाँफ रही थी
अब तो धीरे धीरे शाम हो रही थी
दुकान बंद करने का वक़्त हो गया था
इस कदर जिंदगी थक गयी थी जिंदगी से
पता नहीं कल फिर दुकान खुलेगी या नहीं
पता नहीं जिंदगी का कर्ज़ मिटेगा या नहीं
आँसू व्यापार बन गये हैं और
मुश्कान कारोबार बन गये हैं
जिंदगी 'बिचारी' दुकान बन गयी है
रिश्ते मुनाफ़ा करने का आधार बन गये हैं
'मानस' तू भी कहाँ बाकी रहा इन बवाल से
तभी तो सभी बुलाते, तुझे व्यापारी के नाम से
कुछ आँसू थे... कुछ मुश्कान थी
यही जिंदगी की छोटी सी दुकान थी
यही जिंदगी की छोटी सी दुकान थी
कब तक महफूज़ रखूं अपने दो हाथों से,
उन लौ को आँधियों से
जब की बाती ने ही भरोसा छोड़ दिया है,
सुबह होने का
ज़ेरे-आब में सख्सियत मिट गयी इंशा तेरी,
किनारे खड़े खड़े
गनीमत समझ ए ख़ुदा नहीं माँगा सबूत तुझसे,
तेरे ख़ुदा होने का
दिल कभी इतना मायूस न हुआ 'मानस' मेरा
टूटने पर भी
लोगों ने न जाने क्यूँ सारे इल्ज़ाम लगाए मुझ पर
तुझसे जुड़ा रहने का
7-23-2012
उन लौ को आँधियों से
जब की बाती ने ही भरोसा छोड़ दिया है,
सुबह होने का
ज़ेरे-आब में सख्सियत मिट गयी इंशा तेरी,
किनारे खड़े खड़े
गनीमत समझ ए ख़ुदा नहीं माँगा सबूत तुझसे,
तेरे ख़ुदा होने का
दिल कभी इतना मायूस न हुआ 'मानस' मेरा
टूटने पर भी
लोगों ने न जाने क्यूँ सारे इल्ज़ाम लगाए मुझ पर
तुझसे जुड़ा रहने का
7-23-2012
जिंदगी को जब भी करीब से देखता हूँ
हर बार अलग अलग सी दिखाई देती है
तेरी ज़ुल्फो को जब जब सहलाता हूँ
लगता है जिंदगी कुछ उलझ सी गयी है
तेरी उदास आँखों में जब नमी देखता हूँ
ऐसा लगता है जैसे छत टपक रही हो
जिंदगी को किस नज़रिए से देखूं
हर बार अलग ही दिखाई देती है
जब जब कदम बढ़ता हूँ तेरी तरफ
लगता है जैसे मंज़िल भटक गयी हो
सब कुछ सही था मगर न जाने क्यूँ
हर जगह ग़लत ही करार दिया गया हूँ
जो हरदम करीब रहती थी मेरी साँसों के
उसी जिंदगी का दम घुटता है करीब आने से
जिंदगी को जब भी करीब से देखता हूँ
हर बार अलग अलग सी दिखाई देती है
हर बार अलग अलग सी दिखाई देती है
तेरी ज़ुल्फो को जब जब सहलाता हूँ
लगता है जिंदगी कुछ उलझ सी गयी है
तेरी उदास आँखों में जब नमी देखता हूँ
ऐसा लगता है जैसे छत टपक रही हो
जिंदगी को किस नज़रिए से देखूं
हर बार अलग ही दिखाई देती है
जब जब कदम बढ़ता हूँ तेरी तरफ
लगता है जैसे मंज़िल भटक गयी हो
सब कुछ सही था मगर न जाने क्यूँ
हर जगह ग़लत ही करार दिया गया हूँ
जो हरदम करीब रहती थी मेरी साँसों के
उसी जिंदगी का दम घुटता है करीब आने से
जिंदगी को जब भी करीब से देखता हूँ
हर बार अलग अलग सी दिखाई देती है
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