भागाकार

April 10, 2012

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તમે બન્યા આકાશ મને ધરતી બનાવી દીધી
અંતરકેવી રીતે મટે, તે બતાવવા નું ભૂલી ગયા
હું બની નદી અને તમને પર્વત બનાવી દીધા
ચંચલ બની વહી તમારા ચરણોં પાસે થી પણ
તમે નીચા નમી સ્નેહ વરસાવા નું ભૂલી ગયા
આ પ્રેમ છે,અહીં દરેક ફરિયાદ માં પણ પ્યાર છે
'માનસ' હવે સમય બદલાઈ ગયો છે, સમજી લે
પ્યાર ની પણ કિંમત, તે હવે બની વ્યાપાર છે
હૃદય ની કોરી સ્લેટ પર ઍક્ડો ઘૂંટાયો માંડ ત્યાં
કોને ખબર કે પ્રેમ માં તો ફક઼્ત ભાગાકાર છૅ
ફક઼્ત ભાગાકાર છે....

गम का एहसास

April 4, 2012

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अगर वक़्त मिल जाए कभी, हमारी महफ़िल में आ जाना
आपको हम तन्हाई का मतलब समझा देंगे
महफ़िल सजाने के लिए लगाए पर्दों के पीछे छिपे
दर्दे-राज में हमराज़ भी बना लेंगे
आपको जिन लोंगों ने सर आँखों पे बिठा रखा था
वो अब हमारी महफ़िल में बेहोश बैठे हैं
उनके दिलों पे बनी सिलवट भी दिखा देंगे
जो मधुर अल्फ़ाज़ आपके दिलों बहलाते रहे
मानस के दिलों से निकले उन अल्फाजों का
एहसासे दर्द भी बता देंगे
और बहोत कुछ बताना है ए हुश्ने-चमन तुमको
कैसे डूब जाते हैं 'दर्द' महफ़िल में वो भी बता देंगे
हो सकता है की तुम खो जाओ हमारी महफ़िल में
मगर जानेमन तुम्हें घर का रास्ता भी बता देंगे
हमारा क्या हम तो बिखरे हुए दिलों की महफ़िल यूँ ही
सजाते रहेंगे और हुश्न से मिले दर्द छुपाते रहेंगे
अगर शराब ग़लत कर सकती हर गम को
महफ़िल में इतना शोर शराबा न होता
कफ़न ओढ़ कर बैठे उन मरीजों का पता भी बता देंगे

बदलना जिन्दगी है ?

March 1, 2012

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समंदर भी वही थे किनारे भी वही थे
मगर लहरें बदल गयीं थी
पत्तों ने सहारा लिया था साखों का
हवा के झोखों ने जुदा कर दिया
उन्हें क्या पता की मौसम बदल गये थे
दिन भर बॉज़ उठाया था जिंदगी का
अब तो सहारे भी थे,मगर क्या पता की
कंधे वही थे सिर्फ़ बॉज़ बदल गये थे
जिंदगी के सफ़र में आगे बढ़ना था
रास्ते भी सही थे मंज़िल भी वही थी
सिर्फ़ मालिके मकान बदल गये थे
सच कभी बदलता नहीं है ऐसे सुना था
सवाल वही थे जवाब भी वही थे
जवाबों के मायने बदल गये थे
बहुत रात हो चुकी 'मानस' अब सो जा
शब्दों को भी सोने दे, मगर उन्हें कहाँ चैन?
वो तो अभी भी करवट बदल रहे थे
शब्द भी वही थे शब्दकोष भी वही थे
हर बात के मतलब बदल रहे थे
सोचा, चलो वापिस चलता हूँ जहाँ से आया था
वापसी का किराया भी दे कर आया था
किनारे भी वही थे कश्ती भी वही थी
माझी ही बदल गये थे
समंदर भी वही थे किनारे भी वही थे
मगर लहरें बदल गयीं थी

अधूरापन

February 21, 2012

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रात ढल गयी पर सुबह ही नहीं आई,
हरबार मेरे हिश्से में अमास ही आई
जागता रहा रात भर इंतज़ार मे तेरे
सपनें में सिर्फ़ तन्हाई ही नज़र आई
लोग कैसे जोड़ लेते हैं जुदाई के रिश्ते
'मानस' हर जगह साजिश ही नज़र आई

January 10, 2012

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દર્દ પણ તમે આપો છો અને દવા પણ
ઉપર થી પ્રણય ને જલદ હવા પણ
કેમ બની ગયા અવાક હવે, જ્યારે
દર્દ નો અહસાહ થયો તમને પણ
................
કેટલીક વાર્તા લખી હતી શબ્દો વગર
જાણે જિંદગી જીવી હતી શ્વાસ વગર
આ તો આઁખોં નો વ્યવહાર હતો જાણે
છેલ્લા પાને પહોંચી ગયા તમે,
વાર્તા નો સાર વાંચ્યા વગર
.................
बहुत संभाल कर रखा था शबाबे अब्र को
नहीं संभाल शका था तेरी हयाते सब्र को
अब क्या करूँ इन फूलों का बतला दो मुझे
जो तुमने चढ़ाए थे कभी मेरी निशानी पे
पलट कर देख नहीं शकता मैं तेरी कब्र को
............
તમે આવ્યા અને પગરવ પણ ના થયો
કદાચ સમય ની સાથે આવ્યા હશો
ઝાઝો ફરક નથી તમ બંને વચ્ચે
ગયા પછી જ પગલા સંભળાય છે.

हिसाब

December 21, 2011

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दिल के कुछ एहसास को कागज में समेट कर भेजा था
जो अल्फ़ाज़ निकले न ज़ुबाँ से उसे भी साथ भेजा था
शायद, काशिद रुक गया होगा कहीं रास्ते में वरना
"मानस" ने आपका नामों-निशा सही लिख कर भेजा था
इंतजार क्या करूँ मैं वक़्त का ? वक़्त रूका न मेरे लिए
जिंदगी की बाकी साँसों का ही हिसाब लिखकर भेजा था

एहसास

December 2, 2011

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जिंदगी बहोत खूबसूरत गुज़री
अगर गमों को साथ ले लूँ तो
मंज़िल भी मिल गयी है मुझे
भटके रास्तों को साथ ले लूँ तो
सबकुछ मिला बिना माँगे ही
गर खोया हुआ साथ ले लूँ तो
सभी फरीस्तों को ही मिला अगर
टूटें रिश्तों को साथ ले लूँ तो
सभी ने साथ दिया उम्र भर
अगर तन्हाइयों को साथ ले लूँ तो
गम-खुशी-आँसू-मुस्कान कुछ भी नहीं
अगर जिंदगी साँसे देना छोड़ दे तो..