आँसू जो तूने दिए थे, आज भी उसे संभाल के रख्खा है,
तूने भी तो वो सूख न जाए उसका बखूबी ख़याल रख्खा है
जख्म जो तूने दिए थे वो तो वक़्त के साथ भर जाएँगे
निशान न मिटे उम्रभर, तूने उसका भी तो ख़याल रख्खा है
लोग मिसाल देते रहे हमारे प्यार के,हम तो मुस्कराते ही रहे
परदा उठ ना जाए हक़ीकत से, तूने उसका भी तो ख़याल रख्खा है
दुनिया बहोत छोटी है, कहीं किसी मोड़ पर तो मिलना ही होगा
तूने नज़रें चुराकर रहगुजर से गुजरने का तो ख़याल रख्खा है
एक दिली ख्वाहिश थी रुखसत से पहले, तुज़े माफ़ करने की
लेकिन तूने भी तो गुनाह कबूल ना करने का ख़याल रख्खा है
तेरी इसी आदत ही ने मुज़े चैन से जीने न दिया जानेमन,
मर न जाएँ हम चैन से उसका भी तो ख़याल रख्खा है
हम और वक़्त....मानस
वक़्त वक़्त कि बात है कि वक़्त भी बदल जाता हैं ,
जन्मों जनम का रिश्ता भी पल मे बदल जाता हैं
मह्फ़िल् की तरह पीते थे हम् जब् तक प्यार था हमसे
अब तो आँसू भी पीते है तो , आँखें भी बुरा मान जाती हैं
बारिश की ख्वाहिश थी सबको , आश ही लगाये बैठे थे हम
बिजली गिरा कर घर पर मेरे, बादल आगे निकल जाते है
न जाने क्यूँ शिकायत भी नहीं कर सकते अपने दिल से हम
बुरे वक़्त में साया तो क्या, धड़कन भी साथ छोड़ जाती है
जन्मों जनम का रिश्ता भी पल मे बदल जाता हैं
मह्फ़िल् की तरह पीते थे हम् जब् तक प्यार था हमसे
अब तो आँसू भी पीते है तो , आँखें भी बुरा मान जाती हैं
बारिश की ख्वाहिश थी सबको , आश ही लगाये बैठे थे हम
बिजली गिरा कर घर पर मेरे, बादल आगे निकल जाते है
न जाने क्यूँ शिकायत भी नहीं कर सकते अपने दिल से हम
बुरे वक़्त में साया तो क्या, धड़कन भी साथ छोड़ जाती है
कल रात मैं कवि सम्मेलन में गया था
बड़े बड़े कवियों का महामेला लगा था
कोई भूखे पेट, तो कोई डकार ले रहा था
कोई संतृप्त थे तो कोई मायूष लग रहा था
कल रात मैं कवि सम्मेलन मैं गया थे
कविताएँ कम और शब्द-युद्धज़्यादा लग रहा था
बड़े कवि कविताओं में छोटे लग रहे थे
छोटे कवि नज़र अंदाज़ लग रहे थे
समझ में नहीं आ रहा था की ये कवि थे?
मूज़े तो सारे राजनेता नज़र आ रहे थे
कल रात मैं कवि सम्मेलन में गया था
कविताओं का विषय था जीवन का हास्य रस
ना कविता में हास्य था,ना रस में कवि था
जीवन का तो कहीं नामोनिशान नहीं था
सभी जमें हुए कवि एकदुजे पे तीर साध रहे थे
लेकिन बचाव के लिए तैयारी-कवच भूल गये थे
कल रात मैं कवि सम्मेलन में गया था
कुछ घायल हुए शब्दोंसे, कुछ हाथों के शिकार हुए
कुछ अपने बचाव और वार के इंतजार में थे
रात गयी बात गयी, कुछ शारीरिक निशान छोड़ गयी
दुसरे दिन का अख़बार लोगोंकी हास्यका सबब बन गयी
कवि सम्मेलन से ज़्यादा अख़बार में रस घोल गयी
इसी लिए किताबें कम,अख़बारों की बिक्री बढ़ गयी
कल रात मैं कवि सम्मेलन में...नहीं गया..
अगले दिन का अख़बार खरीद लिया
बड़े बड़े कवियों का महामेला लगा था
कोई भूखे पेट, तो कोई डकार ले रहा था
कोई संतृप्त थे तो कोई मायूष लग रहा था
कल रात मैं कवि सम्मेलन मैं गया थे
कविताएँ कम और शब्द-युद्धज़्यादा लग रहा था
बड़े कवि कविताओं में छोटे लग रहे थे
छोटे कवि नज़र अंदाज़ लग रहे थे
समझ में नहीं आ रहा था की ये कवि थे?
मूज़े तो सारे राजनेता नज़र आ रहे थे
कल रात मैं कवि सम्मेलन में गया था
कविताओं का विषय था जीवन का हास्य रस
ना कविता में हास्य था,ना रस में कवि था
जीवन का तो कहीं नामोनिशान नहीं था
सभी जमें हुए कवि एकदुजे पे तीर साध रहे थे
लेकिन बचाव के लिए तैयारी-कवच भूल गये थे
कल रात मैं कवि सम्मेलन में गया था
कुछ घायल हुए शब्दोंसे, कुछ हाथों के शिकार हुए
कुछ अपने बचाव और वार के इंतजार में थे
रात गयी बात गयी, कुछ शारीरिक निशान छोड़ गयी
दुसरे दिन का अख़बार लोगोंकी हास्यका सबब बन गयी
कवि सम्मेलन से ज़्यादा अख़बार में रस घोल गयी
इसी लिए किताबें कम,अख़बारों की बिक्री बढ़ गयी
कल रात मैं कवि सम्मेलन में...नहीं गया..
अगले दिन का अख़बार खरीद लिया
कोंन गुनाहगार ?
तेरी झील सी आँखों में डूब जाना था मुझको
कम्बख़त तेरे दो आँसू ने किनारे लगा दिया
तेरे होंठों के दो पयमाने भी ना छुए थे अभी
खुद लड़खड़ाते हुए जमाने ने शराबी बना दिया
साथ तेरे मंज़िल पानी थी मुझको ए हमनशीं
तूने मंज़िल पाने को मुझे रास्ता बना दिया
खुदा समझा था ए पत्थर दिल तुझे मैने
अच्छे ख़ासे मानस को पत्थर बना दिया
कम्बख़त तेरे दो आँसू ने किनारे लगा दिया
तेरे होंठों के दो पयमाने भी ना छुए थे अभी
खुद लड़खड़ाते हुए जमाने ने शराबी बना दिया
साथ तेरे मंज़िल पानी थी मुझको ए हमनशीं
तूने मंज़िल पाने को मुझे रास्ता बना दिया
खुदा समझा था ए पत्थर दिल तुझे मैने
अच्छे ख़ासे मानस को पत्थर बना दिया
फर्क इतना ही.......
जब भी कोई हिस्सा कटा शरीर का
खून ही निकला है
आपकी नज़र में आपका खून था
मेरा पानी ही निकला है
दर्द का जब भी कोई नुश्का मिला
आपकी दवा थी
मेरा जहर ही निकला है
मैने जो खोया वो मेरा था
जो पाया वो आपका निकला है
मुश्किलों का मुकाम जब भी ढूँढा
पता आपका ही निकला है
खून ही निकला है
आपकी नज़र में आपका खून था
मेरा पानी ही निकला है
दर्द का जब भी कोई नुश्का मिला
आपकी दवा थी
मेरा जहर ही निकला है
मैने जो खोया वो मेरा था
जो पाया वो आपका निकला है
मुश्किलों का मुकाम जब भी ढूँढा
पता आपका ही निकला है
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