समंदर भी वही थे किनारे भी वही थे
मगर लहरें बदल गयीं थी
पत्तों ने सहारा लिया था साखों का
हवा के झोखों ने जुदा कर दिया
उन्हें क्या पता की मौसम बदल गये थे
दिन भर बॉज़ उठाया था जिंदगी का
अब तो सहारे भी थे,मगर क्या पता की
कंधे वही थे सिर्फ़ बॉज़ बदल गये थे
जिंदगी के सफ़र में आगे बढ़ना था
रास्ते भी सही थे मंज़िल भी वही थी
सिर्फ़ मालिके मकान बदल गये थे
सच कभी बदलता नहीं है ऐसे सुना था
सवाल वही थे जवाब भी वही थे
जवाबों के मायने बदल गये थे
बहुत रात हो चुकी 'मानस' अब सो जा
शब्दों को भी सोने दे, मगर उन्हें कहाँ चैन?
वो तो अभी भी करवट बदल रहे थे
शब्द भी वही थे शब्दकोष भी वही थे
हर बात के मतलब बदल रहे थे
सोचा, चलो वापिस चलता हूँ जहाँ से आया था
वापसी का किराया भी दे कर आया था
किनारे भी वही थे कश्ती भी वही थी
माझी ही बदल गये थे
समंदर भी वही थे किनारे भी वही थे
मगर लहरें बदल गयीं थी
अधूरापन
रात ढल गयी पर सुबह ही नहीं आई,
हरबार मेरे हिश्से में अमास ही आई
जागता रहा रात भर इंतज़ार मे तेरे
सपनें में सिर्फ़ तन्हाई ही नज़र आई
लोग कैसे जोड़ लेते हैं जुदाई के रिश्ते
'मानस' हर जगह साजिश ही नज़र आई
हरबार मेरे हिश्से में अमास ही आई
जागता रहा रात भर इंतज़ार मे तेरे
सपनें में सिर्फ़ तन्हाई ही नज़र आई
लोग कैसे जोड़ लेते हैं जुदाई के रिश्ते
'मानस' हर जगह साजिश ही नज़र आई
દર્દ પણ તમે આપો છો અને દવા પણ
ઉપર થી પ્રણય ને જલદ હવા પણ
કેમ બની ગયા અવાક હવે, જ્યારે
દર્દ નો અહસાહ થયો તમને પણ
................
કેટલીક વાર્તા લખી હતી શબ્દો વગર
જાણે જિંદગી જીવી હતી શ્વાસ વગર
આ તો આઁખોં નો વ્યવહાર હતો જાણે
છેલ્લા પાને પહોંચી ગયા તમે,
વાર્તા નો સાર વાંચ્યા વગર
.................
बहुत संभाल कर रखा था शबाबे अब्र को
नहीं संभाल शका था तेरी हयाते सब्र को
अब क्या करूँ इन फूलों का बतला दो मुझे
जो तुमने चढ़ाए थे कभी मेरी निशानी पे
पलट कर देख नहीं शकता मैं तेरी कब्र को
............
તમે આવ્યા અને પગરવ પણ ના થયો
કદાચ સમય ની સાથે આવ્યા હશો
ઝાઝો ફરક નથી તમ બંને વચ્ચે
ગયા પછી જ પગલા સંભળાય છે.
ઉપર થી પ્રણય ને જલદ હવા પણ
કેમ બની ગયા અવાક હવે, જ્યારે
દર્દ નો અહસાહ થયો તમને પણ
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કેટલીક વાર્તા લખી હતી શબ્દો વગર
જાણે જિંદગી જીવી હતી શ્વાસ વગર
આ તો આઁખોં નો વ્યવહાર હતો જાણે
છેલ્લા પાને પહોંચી ગયા તમે,
વાર્તા નો સાર વાંચ્યા વગર
.................
बहुत संभाल कर रखा था शबाबे अब्र को
नहीं संभाल शका था तेरी हयाते सब्र को
अब क्या करूँ इन फूलों का बतला दो मुझे
जो तुमने चढ़ाए थे कभी मेरी निशानी पे
पलट कर देख नहीं शकता मैं तेरी कब्र को
............
તમે આવ્યા અને પગરવ પણ ના થયો
કદાચ સમય ની સાથે આવ્યા હશો
ઝાઝો ફરક નથી તમ બંને વચ્ચે
ગયા પછી જ પગલા સંભળાય છે.
हिसाब
दिल के कुछ एहसास को कागज में समेट कर भेजा था
जो अल्फ़ाज़ निकले न ज़ुबाँ से उसे भी साथ भेजा था
शायद, काशिद रुक गया होगा कहीं रास्ते में वरना
"मानस" ने आपका नामों-निशा सही लिख कर भेजा था
इंतजार क्या करूँ मैं वक़्त का ? वक़्त रूका न मेरे लिए
जिंदगी की बाकी साँसों का ही हिसाब लिखकर भेजा था
जो अल्फ़ाज़ निकले न ज़ुबाँ से उसे भी साथ भेजा था
शायद, काशिद रुक गया होगा कहीं रास्ते में वरना
"मानस" ने आपका नामों-निशा सही लिख कर भेजा था
इंतजार क्या करूँ मैं वक़्त का ? वक़्त रूका न मेरे लिए
जिंदगी की बाकी साँसों का ही हिसाब लिखकर भेजा था
एहसास
जिंदगी बहोत खूबसूरत गुज़री
अगर गमों को साथ ले लूँ तो
मंज़िल भी मिल गयी है मुझे
भटके रास्तों को साथ ले लूँ तो
सबकुछ मिला बिना माँगे ही
गर खोया हुआ साथ ले लूँ तो
सभी फरीस्तों को ही मिला अगर
टूटें रिश्तों को साथ ले लूँ तो
सभी ने साथ दिया उम्र भर
अगर तन्हाइयों को साथ ले लूँ तो
गम-खुशी-आँसू-मुस्कान कुछ भी नहीं
अगर जिंदगी साँसे देना छोड़ दे तो..
अगर गमों को साथ ले लूँ तो
मंज़िल भी मिल गयी है मुझे
भटके रास्तों को साथ ले लूँ तो
सबकुछ मिला बिना माँगे ही
गर खोया हुआ साथ ले लूँ तो
सभी फरीस्तों को ही मिला अगर
टूटें रिश्तों को साथ ले लूँ तो
सभी ने साथ दिया उम्र भर
अगर तन्हाइयों को साथ ले लूँ तो
गम-खुशी-आँसू-मुस्कान कुछ भी नहीं
अगर जिंदगी साँसे देना छोड़ दे तो..
इंसानियत ?
आकाश को मिले चाँद, सूरज और सितारे
साथ में सहारा मिला बादलों का
धरती को मिली समुंदर की गहराई
और साथ मिले पर्वतों की उँचाई भी
नदियाँ और पेड़ के मिले सौगाद भी
हमको मिला सब कुछ बिना माँगे ही
नहीं समझ सके रिश्तों की गहराई को
नहीं समझ सके प्यार की उँचाई को
सामे जिंदगी में लेके घूमते रहे तन्हाई को
सूरज की गर्मी ने चुरा लिया पानी धरती से
और वक़्त आने पर
प्यार की बौछार से लौटा भी दिया
फ़र्क इतना है की हमने लिया सब कुछ
इस्तेमाल किया, और लौटना भूल गये
साथ में सहारा मिला बादलों का
धरती को मिली समुंदर की गहराई
और साथ मिले पर्वतों की उँचाई भी
नदियाँ और पेड़ के मिले सौगाद भी
हमको मिला सब कुछ बिना माँगे ही
नहीं समझ सके रिश्तों की गहराई को
नहीं समझ सके प्यार की उँचाई को
सामे जिंदगी में लेके घूमते रहे तन्हाई को
सूरज की गर्मी ने चुरा लिया पानी धरती से
और वक़्त आने पर
प्यार की बौछार से लौटा भी दिया
फ़र्क इतना है की हमने लिया सब कुछ
इस्तेमाल किया, और लौटना भूल गये
कुछ कर्ज जो नहीं चुकाए अभी
जिंदगी मिली थी किस्तों में
कुछ और किश्त चुकानें बाकी है
रोज सुबह पहनता हूँ नया कफ़न
कुछ और पहनना बाकी है
कर्ज़ दोनों का चुकाना है मुज़को
अदा किसका करूँ पहले ए कफ़न
अभी जिंदगी का चुकाना बाकी है
कुछ और किश्त चुकानें बाकी है
रोज सुबह पहनता हूँ नया कफ़न
कुछ और पहनना बाकी है
कर्ज़ दोनों का चुकाना है मुज़को
अदा किसका करूँ पहले ए कफ़न
अभी जिंदगी का चुकाना बाकी है
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