जब भी कोई हिस्सा कटा शरीर का
खून ही निकला है
आपकी नज़र में आपका खून था
मेरा पानी ही निकला है
दर्द का जब भी कोई नुश्का मिला
आपकी दवा थी
मेरा जहर ही निकला है
मैने जो खोया वो मेरा था
जो पाया वो आपका निकला है
मुश्किलों का मुकाम जब भी ढूँढा
पता आपका ही निकला है
मन के रिश्ते
लोग कहते है रिश्ते बदल जाते है
वक्त के साथ मौसम भी बदल जातें है
सिंचा था खूने जिगर से जिसे
वो लहू के रंग भी बदल जाते हैं
नज़र के ओज़ल होते ही निगाहें बदल
जाती है जबसे इंसान ने सम्भाला है इसे
रिश्तों को कभी खुदा माना जाता था जहाँ
मज़हब के बदलते ही खुदा भी बदल जाते हैं
वक्त के साथ मौसम भी बदल जातें है
सिंचा था खूने जिगर से जिसे
वो लहू के रंग भी बदल जाते हैं
नज़र के ओज़ल होते ही निगाहें बदल
जाती है जबसे इंसान ने सम्भाला है इसे
रिश्तों को कभी खुदा माना जाता था जहाँ
मज़हब के बदलते ही खुदा भी बदल जाते हैं
देर रात जब सिरहाने पे सर रखता हूँ
दिन भर उठाए बॉज़ से कंधे दर्द करते है
कभी जिंदगी के बॉज़ उठाए जीने के लिए
कभी जीना भी बॉज़ बन गया ज़िदगी के लिए
कभी रिश्तों के सहारे बॉज़ कम कर दिए
कभी रिश्तें ही दर्द की वजह बन गये
हर सुबह उठता हूँ नई सुबह के लिए
की आज खुद का ही बॉज़ उठा के जी लूँगा
आदत सी हो गयी बॉज़ उठाने की
अब तो खुद का बॉज़ भी कम लगता है
सोजा ए 'मन' आज की रात आराम से
ताकी नींद भी तेरा बॉज़ उठा सके आराम से
दिन भर उठाए बॉज़ से कंधे दर्द करते है
कभी जिंदगी के बॉज़ उठाए जीने के लिए
कभी जीना भी बॉज़ बन गया ज़िदगी के लिए
कभी रिश्तों के सहारे बॉज़ कम कर दिए
कभी रिश्तें ही दर्द की वजह बन गये
हर सुबह उठता हूँ नई सुबह के लिए
की आज खुद का ही बॉज़ उठा के जी लूँगा
आदत सी हो गयी बॉज़ उठाने की
अब तो खुद का बॉज़ भी कम लगता है
सोजा ए 'मन' आज की रात आराम से
ताकी नींद भी तेरा बॉज़ उठा सके आराम से
लोग कहतें है
जिंदगी तो बेवफा है
जिंदगी चार दिन की है
जिंदगी चार पल की है
इसी लिए में जिंदगी को
एक पल में जीना चाहता हूँ,
तो बाकी के तीन पल
उसे जाता देख सकूँ
उस एक पल को मैं एक
जिंदगी देना चाहता हूँ
तो बाकी के तीन पल
उसे महसूस कर सकें
वो न बेवफा है
न चार पल की है
वो जिंदगी है उसे
जिंदगी ही रहने दो
मन की ही रहने दो
जिंदगी तो बेवफा है
जिंदगी चार दिन की है
जिंदगी चार पल की है
इसी लिए में जिंदगी को
एक पल में जीना चाहता हूँ,
तो बाकी के तीन पल
उसे जाता देख सकूँ
उस एक पल को मैं एक
जिंदगी देना चाहता हूँ
तो बाकी के तीन पल
उसे महसूस कर सकें
वो न बेवफा है
न चार पल की है
वो जिंदगी है उसे
जिंदगी ही रहने दो
मन की ही रहने दो
अजनबी शहर में...
हर जगह हँसते चेहरे मिले
तेरे अजनबी शहेर में
हर कोई मूज़े अपना सा लगा
तेरे अजनबी शहेर में
तुज़से मिलने के बाद खो गया
तेरे अजनबी शहेर में
कभी सोचा न था यूँ दिल टूटेगा
तेरे अजनबी शहेर में
लगता हैअपना, हर गली नुक्कड़ पे
तेरे अजनबी शहेर में
जैसे हर कोई अदाकार है
तेरे अजनबी शहेर में
तेरे अजनबी शहेर में
हर कोई मूज़े अपना सा लगा
तेरे अजनबी शहेर में
तुज़से मिलने के बाद खो गया
तेरे अजनबी शहेर में
कभी सोचा न था यूँ दिल टूटेगा
तेरे अजनबी शहेर में
लगता हैअपना, हर गली नुक्कड़ पे
तेरे अजनबी शहेर में
जैसे हर कोई अदाकार है
तेरे अजनबी शहेर में
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