April 22, 2011

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मानस भ्रम...
तेरे चले जाने के गम को प्यार समज बैठे
नादान बन कर दो आँसू भी बहा बैठे
एक बार पीछे मूड के तो देखेंगे ज़रूर
इसी इंतज़ार मे ज़िदगी के लम्हें लूटा बैठे
मूड के आए भी तो किसी और के साथ
तस्लिम के लिए ग़लती से सर झुका बैठे
5-22-2011

कोंन गुनाहगार ?

April 12, 2011

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तेरी झील सी आँखों में डूब जाना था मुझको
कम्बख़त तेरे दो आँसू ने किनारे लगा दिया
तेरे होंठों के दो पयमाने भी ना छुए थे अभी
खुद लड़खड़ाते हुए जमाने ने शराबी बना दिया
साथ तेरे मंज़िल पानी थी मुझको ए हमनशीं
तूने मंज़िल पाने को मुझे रास्ता बना दिया
खुदा समझा था ए पत्थर दिल तुझे मैने
अच्छे ख़ासे मानस को पत्थर बना दिया

फर्क इतना ही.......

March 26, 2011

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जब भी कोई हिस्सा कटा शरीर का
खून ही निकला है
आपकी नज़र में आपका खून था
मेरा पानी ही निकला है
दर्द का जब भी कोई नुश्का मिला
आपकी दवा थी
मेरा जहर ही निकला है
मैने जो खोया वो मेरा था
जो पाया वो आपका निकला है
मुश्किलों का मुकाम जब भी ढूँढा
पता आपका ही निकला है

मन के रिश्ते

March 9, 2011

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लोग कहते है रिश्ते बदल जाते है
वक्त के साथ मौसम भी बदल जातें है
सिंचा था खूने जिगर से जिसे
वो लहू के रंग भी बदल जाते हैं
नज़र के ओज़ल होते ही निगाहें बदल
जाती है जबसे इंसान ने सम्भाला है इसे
रिश्तों को कभी खुदा माना जाता था जहाँ
मज़हब के बदलते ही खुदा भी बदल जाते हैं

February 26, 2011

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देर रात जब सिरहाने पे सर रखता हूँ
दिन भर उठाए बॉज़ से कंधे दर्द करते है
कभी जिंदगी के बॉज़ उठाए जीने के लिए
कभी जीना भी बॉज़ बन गया ज़िदगी के लिए
कभी रिश्तों के सहारे बॉज़ कम कर दिए
कभी रिश्तें ही दर्द की वजह बन गये
हर सुबह उठता हूँ नई सुबह के लिए
की आज खुद का ही बॉज़ उठा के जी लूँगा
आदत सी हो गयी बॉज़ उठाने की
अब तो खुद का बॉज़ भी कम लगता है
सोजा ए 'मन' आज की रात आराम से
ताकी नींद भी तेरा बॉज़ उठा सके आराम से

February 21, 2011

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लोग कहतें है
जिंदगी तो बेवफा है
जिंदगी चार दिन की है
जिंदगी चार पल की है
इसी लिए में जिंदगी को
एक पल में जीना चाहता हूँ,
तो बाकी के तीन पल
उसे जाता देख सकूँ
उस एक पल को मैं एक
जिंदगी देना चाहता हूँ
तो बाकी के तीन पल
उसे महसूस कर सकें
वो न बेवफा है
न चार पल की है
वो जिंदगी है उसे
जिंदगी ही रहने दो
मन की ही रहने दो

February 4, 2011

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अंजान राहें चलते रहें
रास्तों में रिश्तें मिले
रिश्तों ने संबंधों को मिलाया
संबंध ने बंधन को बनाया
अब सांस लेने में घुटन होती है
काश अंजान रहें मिल जाएँ फिर से
मंज़िल मिल जाएँ कहीं